बरसात

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बरसात
अधिक वर्षा से संतरे की फसल तबाही की कगार पर आठनेर (प्रकाश खातरकर) कीसानो की मुश्किल रुकने का नाम नही ले रही है।फसल चक्र को बदल बदल कर किसान नए नए जतन कर रहा है पर कभी कम वर्षा से बर्बाद हो रहा तो कभी अधिक वर्षा किसान की कमर तोड़ने में कसर नही छोड़ रही है।कुलमिलाकर कहते है न खेती मानसून का जुआ है बस किसान यही जुआ खेल रहे है। अब उदाहरणस्वरूप आसानी से समझ सकते है की आठनेर ,मुलताई और भैसदेही तहसील के महाराष्ट्र की सीमा से सटे ग्रामो के किसान दो दशकों से संतरे की फसल को महत्व देकर उसके उत्पादन में शानदार योगदान देते आ रहे है।शायद इसी वजह से तीनों तहसीलों के सीमावर्ती एरिया को ऑरेंज एरिया के रूप में ख्याति मिली हुई है।मग़र ये संतरा उत्पादक कीसान पिछले चार वर्षों से मानसून की दगाबाजी के शिकार हो रहे है।ताजा हालात की जानकारी देते हुए ग्राम केलबेहरा के संतरा उत्पादक किसान धनराज गावंडे ने बताया की इस वर्ष संतरे की अंबिया फसल अपने उत्कर्ष पर थी लेकिन एक माह से हो रही लगातार वर्षा ने संतरे में गलन पैदा कर दी है।बगीचों में संतरे अपने आप गिरने लगे है।किसान धनराज के मुताबिक संतरे पेड़ो के डंठल सड़ने के कारण फल गिरने लगे है।ऐसे में किसान बेहद चिंतित है ऊपर बारिश रुकने का नाम नही ले रही है।इस तरह से और एकाध सप्ताह वर्षा हुई तो किसान बर्बाद हो जाएंगे।धनराज गावंडे ने यह भी बताया की उनके खुद के पास 2 हजार पेड़ है जिन पर लगभग 7 लाख फल लदे है परन्तु अधिक वर्षा से फल गिरने लगे है।महंगी से महंगी दवाओं के स्प्रे के बावजूद फल गिरने का क्रम बदस्तूर जारी है।इसी तरह की जानकारी देते हुए किसान आनन्दराव तायड़े बताते है की इस बार अंबिया फसल का उत्पादन अच्छा हो सकता था परन्तु लगातार पानी के कारण संतरा फसल तबाही के कगार पर जा पहुची है।आनन्दराव के अनुसार संतरे के एक पेड़ के पोषण के लिए गोबर खाद और समय समय पर दवाई के स्प्रे को जोड़ा जाए तो चार सौ रु का खर्च आता है।उस लिहाज से वर्षा के तेवर यही रहे तो खर्च भी नही निकलने वाला है।कुलमिलाकर बरसात कीसानो के लिए आफत का सबब साबित होने जा रही है।ज्ञात हो की आठनेर तहसील के अलावा मुलताई ,भैसदेही के अधीकाँश सीमावर्ती ग्रामो में संतरे की फसल के यही हाल है जिसके कारण दो सैकड़ा से अधिक किसान प्रभावित होने की आशंका है।फिलहाल प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नही है।