पत्थरबाजों से 700 लोग कैसे हुए घायल देखे यह लींक

पत्थरबाजों से 700 लोग कैसे हुए घायल देखे यह लींक

बैतूल (ब्यूरो) अजीब विडम्बना है अपने देश मे एक ओर जब कश्मीर में सेना के जवानों पर पत्थरबाजी हो रही थी तो देश मे हल्ला मचा था उसे देखते हुए सरकार ने संविधान के  अनुच्छेद में कतिपय बदलाव कीये तो पत्थरबाज कश्मीर से गायब दीख रहे है।वही दूसरी ओर मध्यप्रदेश के सी एम के गृह जिले  छिंदवाड़ा में विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेले की पत्थरबाजी में  700 लोग घायल होने की खबरे आज अखबारों की हेडलाइन बनी हुई है।इस पत्थरबाजी  को लेकर लोगो को बेसब्री से इंतजार रहता है दूर दूर से लोग अपनी सुरक्षा के इंतजामात के साथ यहां आते है और इस 17 वी सदी से चली आ रही अमानवीय परंपरा के संबंध में अनसुलझे सवाल लेकर लौट जाते है ।

इस गोटमार मेले (पत्थरबाजी) का आज के इस वैज्ञानिक दौर में अंधविश्वास को बढ़ावा देने से ज्यादा कोई महत्व बचा नही है उसके बावजूद भी जब लोग जानबूझकर घायल होने से लेकर मरने मारने की इंतेहा की लकीर को पार करते जा रहे है तो लोगो मे एक उत्सुकता का माहौल बना रहता है।और इसी  कट्टर सोच के रंग की चाशनी में भिगोकर धार्मीक आवरण लपेटकर गोटमार मेले का आयोजन होते आ रहा है।इस पत्थरबाजी का इतिहास पलटे तो ज्ञात होता है की अब तक सैकड़ो लोगो की जान जा चुकी है।बहरहाल  इस गोटमार मेले में एक दूसरे के ओर फेके जाने वाले पत्थरो से सात सौ लोग घायल हो गए।जबकी इसी पत्थरबाजी के कारण काश्मीर से एक विशेष धारा को हटाकर वहां अमन के पैगाम को मुकम्मल तौर पर स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार पूरी ताकत लगा रही है ।

जबकी दूसरी ओर मध्यप्रदेश सरकार  इसी तरह की पत्थरबाजी के लिए विशेष प्रबंध करते चली आ रही है। अमानवीय परम्पराओ की वैशाखी पर लटके लोगो को गोटमार मेले के ताजा समाचार में 7 वर्ष बाद पांढुर्णा ने ग्राम सावरगांव को पत्थर बाजी में हराकर अपना झंडा लहरा दिया।सावरगांव के लोग बहुत उदास मन से घायल अवस्था मे अपना अपना इलाज करवा रहे है।जबकी जो झंडा गाड़ने में सफल रहे वह भी दो सौ से अधीक लोग घायल अवस्था मे इलाज ही करवा रहे है।बहरहाल वर्षो से कौतुक का विषय रहा यह गोटमार मेला सम्पन्न हुआ।पहले की तरह ही आज भी प्रशासन और शासन मूकदर्शक की तरह घायलों को अस्पताल पहुचाते रहा। प्रश्न अब भी वही है की काश्मीर और छिंदवाड़ा जिले के इस पत्थरबाजी मे क्या अंतर है? को कौन  रहा है???