रामायण से मिलती है रिश्तों की मर्यादा के पालन की शिक्षा : पं. संतोष द्विवेदी*

रामायण से मिलती है रिश्तों की मर्यादा के पालन की शिक्षा : पं. संतोष द्विवेदी*

*रामायण से मिलती है रिश्तों की मर्यादा के पालन की शिक्षा : पं. संतोष द्विवेदी*

*इमली मोहल्ला हनुमान मंदिर में श्रीरामकथा का आंठवा दिन*

*हजारों श्रोता कथा सुनने पहुंचे*

*घोड़ाडोंगरी*। राम ने पिता का वचन निभाने के लिए अयोध्या का राजपाट तज कर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। सीता जी ने अपने पति का साथ देने के लिए वन में साथ जाने का प्रण किया। लक्ष्मण ने भाई का साथ निभाने के लिए भाई के साथ वनवास स्वीकार किया। श्रीराम, सीता माता और लक्ष्मण ने रिश्तों की मर्यादा पालन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। रामायण हमें रिश्तों की मर्यादा पालन का पाठ पढ़ाती है। यह सद्विचार विद्वान कथावाचक पंडित संतोष द्विवेदी ने ईमली मोहल्ला हनुमान मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के आंठवे दिन की कथा सुनाते हुए व्यक्त किए। 25 जनवरी से शुरू हुई श्रीराम कथा का शनिवार को आंठवा दिन था। इस दिन आचार्य पंडित संतोष द्विवेदी ने राम वनवास-वनगमन, केवट प्रसंग की कथा सुनाई। राम वनगमन की कथा सुनाते हुए पंडित द्विवेदी ने कहा कि राम जब वन के लिए प्रस्थान कर गए तो अयोध्या वासियों के जीवन में खाली पन आ गया। कलयुग में भी यही स्थिती है। जिसके जीवन में राम है उसके जीवन में आनंद है और जिसके जीवन से राम चले जाएं उसका जीवन खाली हो जाता है। केवट प्रसंग की कथा सुनाते हुए आचार्य द्विवेदी ने कहा कि केवट ने अपनी भक्तिपूर्ण चतुरता से अपने वंश का उद्धार कर लिया। यह केवट प्रसंग की विशेषता है। उन्होने कहा कि केवट जी ने जब प्रभु को नदी पार करवाई तब सीताजी अपने पति श्रीराम के चेहरे पर संकोच के भाव देखकर समझ गई कि राम केवट को कुछ देना चाहते हैं लेकिन अभी केवट को देने के लिए उनके पास कुछ नहीं है, यह बात समझकर सीताजी ने अपनी अंगूठी निकालकर पति के आगे कर दी। यह पत्नि की पहचान होती है कि वह बिना कुछ कहे ही अपने पति के मन के भाव समझ जाती है। आचार्य पंडित द्विवेदी ने शनिवार को कथा के दौरान रिश्तों की मर्यादा और रिश्तों में आत्मीयता, समर्पण के भाव का विशेष रूप से उल्लेख किया। 

*आज रविवार को कथा का विश्राम*

*सुबह 8 से सांय 6 बजे तक होंगे आयोजन*

ईमली मोहल्ला हनुमान मंदिर में गत 8 दिनों से चल रही श्रीराम कथा का 9 वें दिन आज रविवार को विश्राम होगा। कथा विश्राम के पूर्व दिन भर हवन-पूजन के विशेष आयोजन रखे गए हैं। इस संबंध में व्यासपीठ से जानकारी देते हुए आचार्य पं.संतोष द्विवेदी ने बताया कि रविवार को सुबह रूद्राभिषेक का कार्यक्रम सुबह 8 बजे से होगा जो कि दोपहर 12 बजे तक चलेगा। इसके बाद हवन होगा, हवन पश्चात दोपहर 1:30 बजे से कथा आरंभ हो जाएगी। कथा का विश्राम सांय 4 बजे होगा। कथा विश्राम के पश्चात पुराण पूजन होगा। कथा के 9 दिनों के दौरान यजमानों द्वारा प्रतिदिन मिट्टी के पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया गया है। पुराण पूजन पश्चात इन पार्थिव शिवलिंगों को विसर्जन हेतु ले जाया जाएगा। सभी भक्तजनों के साथ कथावाचक पं. संतोष द्विवेदी इन पार्थिव शिवलिंगों का विसर्जन संपन्न करांएगे। आचार्य द्विवेदी ने घोड़ाडोंगरी और आसपास के क्षेत्र में रहने वाले भक्तों का आहवान करते हुए कहा कि पिछले 8 दिनों में जो भी कथा श्रवण करने से वंचित रहा है वह 9 वें दिन की कथा और पूजन के अन्य कार्यक्रमों में शामिल होकर अपने जीवन का धन्य बना सकता है।