रावण दहन मामले में सांसद डीडी उइके पर समस्त आदिवासी कोयतुर समाज हुआ आहत । पूरे आदिवासी समाज से मांगे माफ़ी : ब्लाक अध्यक्ष रामचरण इरपाचे ।

आठनेर : विजयदशमी पर्व पर बैतूल जिले की श्री कृष्ण पंजाबी सेवा समिति के द्वारा रावण दहन आयोजन पर सांसद डीडी उइके द्वारा रावण को जलाने पर अब जिले में बबाल मच गया हैं । जिले की आदिवासी कोयतुर समाज सांसद महोदय के इस कृत्य पर पूरा समाज आहत है । आपको बता दे कि सांसद डीडी उइके खुद ही आदिवासी समाज के प्रधान सम्प्रदाय से आते है और आदिवासियों में प्रधान गोंड़ का विशेष दर्जा हैं , इसके बावजूद भी अपनी संस्कृति और पूर्वजो को राजनीति में कदम रखते ही कैसे भूल गए । आठनेर ब्लाक अध्यक्ष रामचरण इरपाचे ने बताया कि आदिवासी समाज हमेशा से प्रकृति , अपने पूर्वजो की पूजा अर्चना करता आया हैं ।मान्यता हैं कि आदिवासी कोयतुर समाज मे हमारे पुरखे और हम सब भी रावण को अपना पूर्वज मानते है और उसकी पूजा भी की जाती हैं , इसके उदाहरण भी मिलते है । किन्तु जिस तरह से खुद ही सांसद महोदय आदिवसी समाज से आते है और उनके द्वारा इस रावण दहन में रावण के पुतले को अग्नि देना इस पर पूरा जिला , प्रदेश और देश के आदिवासी कोयतुर समाज आहत हुआ हैं। इरपाचे ने यह भी बताया कि होलिका पर्व पर लगने वाले फागुन मेले में भी खंडराई में लगे तीन पाव इस बात का सबूत हैं कि एक रावण , कुम्भकर्ण और मेघनाथ के रूप में पूजा की जाती हैं। आदिवासी रावण को अपना आराध्य मानता हैं और जूस तरह से रावण अपने वचनों पर अडिग रहता हैं कोयतुर समाज के लोग भी अपने वचनों के अडिग व संस्कृति को मानने वाले होते है । इन सब के बावजूद भी इस तरह से सांसद महोदय के किये कार्य की समाज और समाज से जुड़े सभी संघटनो द्वारा इसकी कड़ी निंदा की जा रही हैं और समाज मे इससे सांसद महोदय के प्रति आक्रोश भी हुआ हैं । सांसद डीडी उइके द्वारा पूरे आदिवासी समाज से माफ़ी मांगने और आदिवासी समाज की संस्कृति के अनुसार पुनः उन्हें समाज मे वापस ले कि बात कही जा रही हैं ।