पढ़ना जरूरी हैं : अगर रहना है स्वस्थ तो चिकित्सा अधिकारी की यह बात आपको जानना जरूरी हैं।

जाने एक चिकित्सा अधिकारी की बात , जो आपको स्वस्थ रखने के लिये जरूरी हैं ।

पढ़ना जरूरी हैं : अगर रहना है स्वस्थ तो चिकित्सा अधिकारी की यह बात आपको जानना जरूरी हैं।
बैतूल : राष्ट्रीय विश्व मानसिक दिवस.एक . सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की बात जो आपके लिये बेहद जरूरी हैं । हमारी राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार भारत की आबादी के करीब 14% लोग सक्रिय मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित है और करीबन 200000 से अधिक लोग मानसिक रोगों से ग्रस्त होकर आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं । अभी नई रिसर्च के अनुसार भारत की कुल आबादी की 13.7% यानी कि 17 करोड लोग कई प्रकार के मानसिक रोग के शिकार हैं । आज की भागती दौड़ती digital mobile computer की जिंदगी जिसने हमें प्रकृति से और खुद से बेहद दूर कर दिया है। शरीर की थकान एक आम बात है। कभी-कभी थकान की वजह से हम किसी शारीरिक बीमारी का भी शिकार बन जाते हैं। और आसानी से उसका इलाज मिल ही जाता है। ,शारीरिक बीमारी सभी को नजर आती है लेकिन इस भाग दौड़ स्ट्रेस भरी जिंदगी में मानसिक बीमारी बहुत बड़ी समस्या बनकर सामने आती है बहुत ही कम लोगों को इसके बारे में पता होता है कि वे बीमार है और उसे इलाज की जरुरत है ।, लेकिन मानसिक बीमारी या मानसिक रूप से अस्वस्थ होने पर कभी-कभी उस व्यक्ति को भी पता नहीं चलता, जो खुद इस बीमारी से जूझ रहा होता है।ऐसे में मेंटल हेल्थ को लेकर जागरुकता बेहद जरूरी है। लोगों को मानसिक स्वास्थ्यके प्रति संवेदनशील और जागरूक करने के हम हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवसों का आयोजन करते हैं, हमारे मुख्य उद्देश्य होता है कि लोगों को अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, जब तक आप मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होंगे तब तक आप शारीरिक रूप से भी स्वस्थ नहीं रह सकते। आप सोच रहे होंगे कि आखिर मानसिक रोग है क्या जैसे हमारा शरीर बीमार पड़ सकता है, उसी तरह दिमाग भी बीमार हो सकता है । इस स्थिति को मनोरोग कहा जाता है । “किसी व्यक्ति द्वारा अनुभव की जाने वाली कोई भी बात जो उसी भावनाओं, विचारों और व्यवहार को इस तरह प्रभावित करती है कि वे उसकी सांस्कृति मान्यताओं तथा व्यक्तित्व से मेल न खाएं और उस व्यक्ति तथा उसके परिवार की जिंदगी पर नकारात्मक असर डालें” ,यह सामान्य भाषा में आप यह भी कह सकते हैं कि किसी भी चीज की अधिकता आपको नुकसानदायक होती है उसी प्रकार आपकी मन द्वारा किए गए कार्यों की अधिकता बीमारी का रूप ले लेती है जो मानसिक रोग कहलाती है । एक मानसिक बीमारी आपको बहुत दुखी कर सकती है और अपने दैनिक जीवन में समस्याएं पैदा कर सकती है, जैसे कि बच्चों में स्कूल और पढ़ाई को लेकर चिंता तनाव स्ट्रेस , महिला तथा पुरुषों में काम या रिश्तों में समस्याएं उत्पन्न होना। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी भारती देशमुख बताती है कि मानसिक रोगों के लक्षण क्या हो सकते हैं, कई बार अनुभव करते हैं जैसे कि अपमान है आत्मविश्वास की कमी आपके ऑफिस या फिर आपके कार्यक्षेत्र में कठोर नियम कानून श्या या फिर आपके जीवन में प्रेम का अभाव या बिजनेस में खेती में या फिर किसी भी प्रकार का कोई नुकसान या फिर आपकी प्रिय जन की मृत्यु, पारिवारिक विवाद इत्यादि मानसिक रूप से कमजोरी आपको अवसाद और डिप्रेशन में डालकर मानसिक रोगी बना सकती हैं , उदास महसूस करना। व्याकुल होना या ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी। अत्यधिक भय या चिंताएं या अपराध की भावनाएं महसूस करना। मनोदशा में अत्यधिक परिवर्तन। दोस्तों और अन्य गतिविधियों से अलग होना। थकान, कम ऊर्जा या सोने में समस्याएं। वास्तविकता से अलग हटना (भ्रम), पागलपन या मतिभ्रम। दैनिक समस्याओं या तनाव से निपटने में असमर्थता। समस्याओं व लोगों और लोगों के बारे में समझने में समस्या। शराब या नशीली दवाओं का सेवन। खाने की आदतों में बड़े बदलाव। महिला पुरुषों में कामेच्छा सम्बन्धी बदलाव। अत्यधिक क्रोध या हिंसकव्यवहार आत्मघाती सोच। और कभी कभी जरूरत से ज्यादा नरम और मुलायम हो जाना कभी-कभी मानसिक स्वास्थ्य विकार के लक्षण शारीरिक समस्याओं जैसे पेट दर्द, पीठ दर्द, सिरदर्द या अन्य अस्पष्टीकृत दर्द के रूप में दिखाई देते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी पवार का कहना है कि मानसिक रोगों से बचने के लिए हम क्या कर सकते हैं चलिए जानते हैं। प्रतिदिन नियमित व्यायाम करें , 2.मेडिटेशन करें, 3. संतुलित आहार ले 4. परिवार के साथ समय बिताएं 5. बच्चों के साथ कुछ एक्टिविटी करें कुछ रचनात्मक करें. 6. नकारात्मकता फैलाने वाली न्यूज़ चैनलों से दूर रहें 7. प्रतिदिन 2 मिनट सामूहिक कल्याण की प्रार्थना करें. . सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रुचिका चौकीकर ने बताया सर्वप्रथम आपका खाना पीना जैसे कि ब्रेकफास्ट लंच डिनर इत्यादि का एक निर्धारित सही समय होना चाहिए। प्रतिदिन व्यायाम , योगा, प्राणायाम समय निकालकर ध्यान करें , कुछ ताजी हवा लें, सूरज की रोशनी से मस्तिष्क में सेरोटोनिन का उत्पादन बढ़ जाता है- यह वह रसायन है जो मनोदशा को नियंत्रित करता है। रोज़ सूर्य के प्रकाश में रहना अवसाद से बचने में मदद करता है। शारीरिक गतिविधियां मस्तिष्क के लिए भी फायदेमंद है। व्यायाम ऊर्जा को बढ़ाता, तनाव और मानसिक थकान कम कर देता है। आप ऐसी गतिविधि करें जो आप को आनंद देती हों, ताकि यह प्रक्रिया आप के लिए रोमांचक हो सके। पोषक तत्वों से भरपूर ताजा खाना खाए तनाव से निपटने में शरीर की मदद करता है। विटामिन बी -12 और ओमेगा 3 फैटी एसिड से समृद्ध भोजन मस्तिष्क में मनोदशा नियमित करने वाले रसायनों के स्तर को ऊपर रखता है। पर्याप्त आराम नींद लेना चाहिए, जब हम सो रहे होते हैं शरीर अपने दैनिक टूट–फूट को ठीक करता है। नींद की कमी आप को थकान, तनाव और बीमार महसूस करा सकती है। पर्याप्त व्यायाम भूख को भी बेहतर बनाता है, और आपको पर्याप्त नींद में मदद करता है अपने आप को स्वीकार करें और विश्वास करें आत्मविश्वास को बढ़ाएं हम सब अलग हैं, और हम सब में अपनी खूबियाँ और कमजोरियाँ हैं। अपनी खूबियों की पहचान करना तथा मानना और अपनी कमजोरियों को स्वीकार करने से आप को खुद में विश्वास करने का साहस और आगे बढ़ने का बल मिलता है। हर एक में कमजोरियाँ होती हैं, मुझ में और आप में भी है कोई पूर्ण नहीं है। आप खुद उन कमजोरियों को बदलने के लिए चुन सकते हैं जो कि आप को पसंद नहीं है या उन कमजोरियों को स्वीकार करने के लिए चुन सकते हैं जिनके साथ आप रह सकते हैं। लेकिन यह स्वीकार करना कि आपमें कुछ कमजोरियाँ हैं जैसे हर किसी में होती हैं और यह ठीक है कि आप उत्तम से कुछ कम हैं, यह अपकी मानसिक और भावनात्मक भलाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपनी क्षमताओं को जानने का प्रयास करें । अपने आप को व्यक्त करें, बहुत बार, हम नकारात्मक भावनाओं को व्यक्त करने में शर्माते हैं हम क्या महसूस कर रहे हैं, और हमारी पसंद या ना पसंद क्या है, यह व्यक्त करना हमारे दिमाग की बेचैनी भीड़ वजन को कम करता है। अपनी भावनाओं को दबाना भी हानिकारक हो सकती है। भावनाओं को दबाना वास्तव में भावनाओं को मजबूत बना सकते हैं। या फिर अधिक तनाव का कारण हो सकते है। या फिर भावनाओं को दबाने से आप चिरचिरी क्रोधी या फिर उदासी जैसी भावनाएं आने लगती है यह सभी भावनाएं अभिव्यक्ति की योग्य हैं। हमें केवल यह जानने की जरूरत है कि कैसे व्यक्त करें जिससे हमारे ऊपर, हमारे रिश्तों पर और वातावरण कोई हानि न पहुंचे । कोई भावना स्वयं के द्वारा अच्छी या बुरी नहीं होती। हर भावना महत्वपूर्ण और आवश्यक है। अनुभव की तीव्रता है, और यह कैसे व्यक्त की गई थी (बहुत अधिक या बहुत कम)। स्वयं को सक्रिय रखे और मनोरंजन और मनोरंजक गतिविधियों में खुद को शामिल करें जिससे आप अपने आप को तनावमुक्त पाएंगे तंबाकू शराब बीड़ी गांजा तथा अन्य प्रकार के नशीले पदार्थों से, दूरी बनाए यह आपकी मानसिक स्थिति को परिवर्तित कर आप को अशांत कर सकते हैं जो आपके शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए ही हानिकारक है,. समस्याओं से भागे नहीं खुलकर उनका सामना करें और उसका समाधान ढूंढने का प्रयत्न करें निश्चित ही आपको सफलता और समाधान अवश्य मिलेगा। हमेशा सकारात्मक लोगों के संपर्क में रहे अच्छी पुस्तकें पढ़ें अच्छे-अच्छे ग्रंथ इत्यादि पड़े जिससे आपको सकारात्मक ऊर्जा मिले, निश्चित ही आपको अपने जीवन से उन लोगों को हमेशा के लिए दूर कर देना चाहिए जो आपके जीवन में नकारात्मकता उत्पन्न करते हो। प्रकृति से नाता जोड़िए वृक्षारोपण करें या फिर छोटे-मोटे पौधे अपने घरों में लगाएं ताजे फूल हरी पत्तियां निश्चित ही आपकी आंखों को और आपके मन को बेहद सुकून प्रदान करेगी। आप चाहें तो कुछ पालतू पेट्स जानवर बिल्ली dog अपने घरों में पाल सकते हैं यह काफी हद तक आपके तनाव के स्तर को कम कर सकता है। अंत में स्वस्थ रहे तन्दुरुस्त रहे शुभकामनाए व आभार पुनः आप सदैव स्वस्थ रहे व सेहत का ध्यान रखे । HBBC परिवार भी आप से निवेदन करता है इन जानकारी से अपने आप को अपने स्वास्थ्य ध्यान रखे , सतर्क रहें ।