एक जेलर के विश्वास से केंद्रीय जेल के बंदियों ने जीती कोरोना से जंग

एक जेलर के विश्वास से केंद्रीय जेल के बंदियों ने जीती कोरोना से जंग
एक जेलर के विश्वास से केंद्रीय जेल के बंदियों ने जीती कोरोना से जंग

एक जेलर के विश्वास से केन्द्रीय जेल के बंदियों को कोरेाना से जंग, जिला जेल बैतूल के उपअधीक्षक ने संभाला इंदौर का मोर्चा

बैतूल। वैश्विक महामारी कोरोना के लिए हॉट स्पॉट बने इंदौर की केन्द्रीय जेल में जब कोरोना मरीज मिले तो हड़कंप की स्थिति बन गई थी। 30 अप्रैल को अस्थाई जेल असरावद खुर्द (इंदौर) में 149 बंदियों में 14 कोरोना पॉजीटिव मरीजों की संख्या से जेल प्रशासन स्तब्ध था, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में जेल प्रबंधन ने बैतूल जिला जेल के जेल उपअधीक्षक योगेन्द्र पंवार को बंदियों की देख-रेख एवं मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया। अपनी कार्य कुशलता से जेलर योगेन्द्र पंवार ने बिगड़ते हालातों पर जल्द ही नियंत्रण पाया और 30 अप्रैल से 21 जुलाई तक इंदौर जेल में प्रभार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब केन्द्रीय जेल पूरी तरह से कोरोना संक्रमण से मुक्त हुई। केन्द्रीय जेल में जेलर श्री पंवार द्वारा डीजी संजय चौधरी, केन्द्रीय जेल अधीक्षक राकेश भांगरे एवं  जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर के मार्गदर्शन में कार्य करते हुए बेहतर परिणाम देकर अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया।
21 जुलाई को केन्द्रीय जेल इंदौर से कार्य मुक्त होकर श्री पंवार जिला जेल बैतूल लौट चुके है और वर्तमान में क्वारेंटाईन अवधी में है। 30 अप्रैल को अस्थाई जेल क्वारेंटीन सेंटर इंदौर का प्रभार लेने के दौरान श्री पंवार एक साथ 14 बंदियों के पॉजीटिव होने से असमंजस में थे, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने उन पर जो भरोसा जताया था, वे उस पर पूरी तरह से खरे उतरे। जिला जेल बैतूल में पदस्थ जेलर श्री पंवार को जेल में कोविड-19 के संक्रमण से बंदियों को बचाने के लिए तत्परता से किए गए प्रयासों एवं उनकी कार्य कुशलता के आधार पर चिन्हित किया गया था। श्री पंवार का कहना है कि यह उनके लिए गर्व की बात है कि उन्हें सेवा का अवसर मिला।
8 मई को 27 पर पहुंची कोरोना पॉजीटिव बंदियों की संख्या
अस्थाई जेल क्वारेंटीन सेंटर इंदौर का 30 अप्रैल जुलाई को प्रभार लेने के बाद श्री पंवार ने एक ही लक्ष्य तय किया था कि हर हाल में कोरोना पॉजीटिव मरीज स्वस्थ होकर सामान्य बंदियों के साथ रह सके  और उन्होंने इसमें सफलता भी हासिल की। गौरतलब है कि 30 अप्रैल को 149 बंदियों के लॉकअप में 14 कोरोना पॉजीटिव मरीजों के लिए श्री पंवार के मार्गदर्शन में व्यवस्थाएं बनाई गई। उन्होंने संबसे पहले जेल के क्वारेंटीन सेंटर को अलग-अलग जोन में बांटा। रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में बटे बंदियों को सख्त हिदायत दी गई कि वे एक-दूसरे जोन में शामिल नहीं होगे। 8 मई को जेल में कोरोना पॉजीटिव बंदियों की संख्या 27 पर पहुंची। इस समय भी वे विचलित नहीं हुए और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदशन में बंदियों का भी हौसला बढ़ाते रहे। 13 जुलाई को केन्द्रीय जेल इंदौर में कोरोना पॉजीटिव मरीजों की संख्या शुन्य पर पहुंच चुकी थी। हालांकि 21 जुलाई को 5 नए पॉजीटिव बंदी जेल में मिले है, लेकिन यह सभी नई आमद वाले है। स्थिति पूर्णत: नियंत्रित होने के बाद 21 जुलाई को ही श्री पंवार केन्द्रीय जेल इंदौर के प्रभार से मुक्त किए गए। उन्होंने जिस सूझ-बूझ, निडरता के साथ क्वारेंटीन सेंटर का संचालन किया उसकी सराहना केन्द्रीय और जिला जेल के अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ डीजी संजय चौधरी द्वारा भी की जा रही है। उक्त अवधी में क्वारेंटाईन सेंटर में कुल 709 बंदी दाखिल हुए, जिनमें से 21 जुलाई कुल 440 बंदी एवं 53 कोरोना पॉजीटिव सकुशल वापस हुए। केन्द्रीय जेल इंदौर में कोविड संक्रमण के बदी चिन्हित होने के बाद खंडवा रोड स्थित असरावाद खुर्द में जेल क्वारेंटीन सेंटर खोला गया। श्री पंवार ने जिस कार्य कुशलता का परिचय दिया और कोविड नियंत्रण में भागीदारी निभाई उसके लिए उन्हें केन्द्रीय जेल अधीक्षक द्वारा डेस्क जेलर के प्रमाण पत्र से नवाजा गया। 22 जुलाई को वापस बैतूल जेल में आमद पर जेल अधीक्षक बीके कुडापे सहित पूरे स्टॉफ ने गर्म जोशी से स्वागत किया।
इस तरह जीती बंदियों ने कोरोना से जंग
जेलर श्री पंवार बताते है कि उनके द्वारा जेल को तीन जोन में बांटने के बाद बंदियों की दिनचर्या तय की गई। प्रतिदिन पॉजीटिव बंदियों को योग एवं अभ्यास से जोड़ा गया। नियत समय पर उन्हें चाय, नाश्ता, भोजन एवं हल्दी वाला दूध, काढ़ा पिलवाया गया, जो बंदी कोरोना की वजह से घबराए हुए थे उनकी हौसला अफजाई करने के लिए समय-समय पर मार्गदर्शन भी किया गया। सभी को सकारात्मक सोच से जोड़ते हुए कोरोना को पछाडऩे के प्रति हिम्मत जगाई और इसके सार्थक परिणाम सामने आए। इस दौरान श्री पंवार ने इस बात का भी विशेष ध्यान रखा कि बंदियों के उपचार एवं देखरेख में जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है वे भी सुरक्षित रहे। उनके द्वारा निर्धारित किए गए मापदंडों के पालन से यह सुखद स्थिति में भी रही कि एक भी अधिकारी या कर्मचारी इस लंबे अंतराल के दौरान कोरोना पॉजीटिव नहीं हुआ और न ही किसी में सर्दी, खांसी के लक्षण देखे गए। श्री पंवार ने बताया कि जिस अवधी में वे इंदौर में प्रभारी के रूम में रहे, कोविड-19 मेडिकल टीम के अलावा जेल स्टॉफ एवं वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग उन्हें मिला। सांझा प्रयास से बंदियों को कोरोना मुक्त करने की जंग जीती गई। बैतूल जेलर श्री पंवार की कार्य कुशलता एवं पूरे प्रदेश में उन्हें मिली सराहना पर जेल अधीक्षक बीके कुडापे एवं स्टॉफ, शुभचिंतकों ने बधाई दी है।