उप स्वास्थ्य केंद्र पाठाखेड़ा मेंआरंभ किया गया राष्ट्रीय पोषण आहार सप्ताह : गर्भवत महिला और नवजात बच्चों को बताया तिरंगा थाली के लाभ

उप स्वास्थ्य केंद्र पाठाखेड़ा मेंआरंभ किया गया राष्ट्रीय पोषण आहार सप्ताह : गर्भवत महिला और नवजात बच्चों को बताया  तिरंगा थाली के लाभ
उप स्वास्थ्य केंद्र पाठाखेड़ा मेंआरंभ किया गया राष्ट्रीय पोषण आहार सप्ताह : गर्भवत महिला और नवजात बच्चों को बताया  तिरंगा थाली के लाभ
उप स्वास्थ्य केंद्र पाठाखेड़ा मेंआरंभ किया गया राष्ट्रीय पोषण आहार सप्ताह : गर्भवत महिला और नवजात बच्चों को बताया  तिरंगा थाली के लाभ
उप स्वास्थ्य केंद्र पाठाखेड़ा मेंआरंभ किया गया राष्ट्रीय पोषण आहार सप्ताह : गर्भवत महिला और नवजात बच्चों को बताया  तिरंगा थाली के लाभ
इस माह को स्वास्थ्य विभाग द्वारा पोषण आहार सप्ताह की जगह बदलकर पोषण आहार माह कर दिया इस अवसर पर चिचोली ब्लाक ग्राम पाठाखेडा में पोषन आहार माह का आरंभ किया गया जिसमें क्षेत्र ग्रामीण महिलाओं को तिरंगा थाली जिसमे की एक गर्भवती महिला , एक नव युवती , एक शिशु को मिलने वाले और प्रशासन द्वारा दिये जाने वाले खादय को किस तरह से उपयोग किया जाए इस विषय परजानकारी दी जा रही है । कल हुए ग्राम के कैम्प में इस उत्सव का उद्देश्य समग्र समुदाय में स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस उत्सव के माध्यम से, लोगों को एक स्वस्थ संतुलित आहार अपने भोजन में शामिल करने के बारे में शिक्षित करना है। डब्ल्यूएचओWHO के अनुसार भारत में हर वर्ष 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का आंकड़ा10 लाख से भी अधिक है। भारत में अनुसूचित जनजाति (28%), अनुसूचित जाति (21%), पिछड़ी जाति (20%) और ग्रामीण समुदाय (21%) पर अत्यधिक कुपोषण का बहुत बड़ा बोझ है.। बात करें हम मध्य प्रदेश की कुपोषण की दर 64 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गयी है। (1 से 3 वर्ष) 3 वर्ष की आयु के बच्चों में 4 में से 3 बच्चेु अनीमिया से ग्रसित हैं। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में 1000 में से 4 बच्चेु रतौधी से ग्रसित है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 55 प्रतिशत बच्चे कम वजन के है। और 55 प्रतिशत बच्चों की मौते कुपोषण के कारण होती है। (स्त्रोत-यूनिसेफ और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रकाशन-बाल संजीवनी के अनुसार) सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अंकिता वरवडे़ कहती है कि राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का उद्देश्य लोगों को संतुलित आहार और उनके द्वारा खाए जाने वाले खाद्य समूहों के बारे में जागरूक करना है ताकि वे स्वस्थ स्वच्छ भोजन खाने के बारे में जानकार हो सकें। माताओं और उनके बच्चों के लिए अच्छे पोषण का प्रचार विशेष रूप से सबसे महत्वपूर्ण है। हमारे भारत देश में बहुत से बच्चे कुपोषण का शिकार है और गर्भवती बताएं तथा धात्री माताओं को भी सही पोषण की जानकारी ना हो पाने के कारण शारीरिक बीमारी और कमजोरी से ग्रसित हो जाती है. पोषण आहार की कमी बच्चों के मानसिक विकास पर बुद्धि पर तथा शारीरिक विकास पर विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है तथा आशा कार्यकर्ता काशी नागले द्वारा बताया गया भोजन में क्या शामिल करना है जरूरी अपने भोजन को पोषण से भरपूर बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि आप उसमें दैनिक तौर पर प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम, खनिज-लवण और एंटी ऑक्सिडेंट्स की संतुलित मात्रा शामिल करें। अपने भोजन में उन चीजों को शामिल करें, जिनमें आपको पोषण देने वाली ऐसी तमाम चीजें पर्याप्त मात्रा में हैं।,, हमारे आसपास ग्रामीण अंचल में में ऐसी बहुत सी स्वास्थ्य वर्धक साग सब्जियां है जिनका हमें उचित ज्ञान लेना होगा और अपने भोजन में शामिल करना होगा स्वस्थ और सक्रिय जीवन के लिए मनुष्य को उचित एवं पर्याप्त पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। नियमित शारीरिक गतिविधियों के साथ पर्याप्त, उचित एवं संतुलित आहार अच्छे स्वास्थ्य का आधार है। तथा उपस्थित आशा सहयोगी रजनी प्रजापति आशा कार्यकर्ता काशी नागले, मनोता मर्सकोले, शरबती ,कलावती ,संत्री वटके, द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं मालती वटके, मंगली , बबली इत्यादि के साथ मिलकर पोषण आहार थाली का आयोजन किया गया। और साथ ही गैर संचारी रोग परीक्षण कैंप आयोजन किया गया, कार्यक्रम में मुख्य रूप से ग्राम की सरपंच महोदया, सुपरवाइजर रामकुमार खोबरे , एनएम जानकी कुमरे, तथा अन्य ग्रामीण उपस्थित थे ।