गौ क्रांति दल की मेहनत रंग लाई गोपाष्टमी को लेकर गांव गांव में आई जागरूकता

गौ क्रांति दल की मेहनत रंग लाई गोपाष्टमी को लेकर गांव गांव में आई जागरूकता

पवित्र नगरी में जगह-जगह धूमधाम से मनाया गया गोपाष्टमी पर्व

गौ क्रांति दल की मेहनत रंग लाई गोपाष्टमी को लेकर गांव गांव में आई जागरूकता

मुलताई - भारतवर्ष में गाय को माता का स्थान दिया गया है, ऐसा माना जाता है कि गाय में सभी देवी-देवता समाहित है। गाय की पूजा करने से सभी देवी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। प्राचीन काल में गाय के पालन-पोषण का विशेष महत्व होता था लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ साथ पशुपालकों की संख्या में निरंतर गिरावट आई है जो एक गंभीर विषय है। इसी बात को मद्देनजर रखते हुए मुलताई में कुछ युवाओं द्वारा गौ क्रांति दल के माध्यम से विगत कुछ वर्षों से क्षेत्र के विभिन्न गांव में गौ पालन को लेकर लोगों को जागरुक करने का कार्य किया गया। दल द्वारा गोपाष्टमी पर्व के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का कार्य किया गया। गौ क्रांति दल के गणेश साहू एवं दिनेश कालभोर ने बताया कि विगत 5 वर्षों से गौ क्रांति दल द्वारा गोपाष्टमी पर्व के माध्यम से जागरूकता अभियान चला गया अब उसके परिणाम सामने आने लगे हैं। मुलताई विधानसभा क्षेत्र के 100 से अधिक गांवों में लोग गोपाष्टमी के दिन गौवंश की पूजा-अर्चना कर प्रसादी बांटते हैं। धीरे-धीरे गौवंश पलकों की संख्या बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि उनके द्वारा जहां मुलताई के दो तीन वार्ड से इस पर्व को मनाए जाने की शुरुआत की गई थी जो आज बढ़कर 100 से अधिक गांव में मनाया जा रहा है। आज ही के दिन से भगवान श्री कृष्ण ने शुरू किया था गायों को चराना - जानकार बताते हैं कि गाय एक चलता फिरता औषधालय है। गोवंश कृषि का आधार है। जहां पर गाय होती है वहां ऑक्सीजन का भंडार होता है। वैज्ञानिक बताते हैं कि गोबर से लिपे हुए घर में हानिकारक किरणों का प्रभाव नहीं पड़ता है। पंडित गणेश त्रिवेदी बताते हैं कि पुराणों के अनुसार आज के दिन से भगवान कृष्ण ने गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर इन पंचगव्य का प्रचार प्रसार शुरू किया था। गोपाष्टमी के दिन से ही भगवान श्री कृष्ण ने गायों को चराना शुरु किया था, इसी के चलते उन्हें गोपाल के नाम से भी जाना जाता है। गोपाष्टमी पर्व का धार्मिक ग्रंथों में विशेष महत्व बताया गया है। गोवंश की सुरक्षा एवं पालन के लिए इस पर्व को मनाया जाता है।