सचिन देश शर्मिंदा है?क्यो

सचिन देश शर्मिंदा है?क्यो
.सचिन देश शर्मिंदा है?क्यो अपनी बात बैतूल (नीशा खातरकर की इस पोर्टल से बातचीत के आधार पर यह खबर ) मैं आज देश की आबादी के अनुपात को ध्यान में रखकर और कीस जाती धर्म के लोगो की कितनी हिस्सेदारी देश के चारो सीष्टम में है उसी की जिम्मेदारी और उनकी ताकत और कमजोरी को ध्यान में रखकर पूछना चाहिती हु की अभी हाल ही में सचिन तेंदुलकर को स्वच्छता दूत का पुरुस्कार देश के राष्ट्रपति ने दिया है उसका कोई औचित्य मुझे तो समझ नही आ रहा है।हा उनके करोड़ो प्रशसकों से यह पूछने का मुझे मौलिक अधिकार है की क्या सचिन के किसी परिवार के सदस्य की मौत गटर साफ करने के दौरान हुई है क्या?नही हुई है तो उन्हें यह पुरस्कार देने का क्या मतलब है?ठीक है सरकार जल्दबाजी में तमाम सरकारी उपक्रमो को निजी हाथों के हवाले करना चाहती है और उसमें वह कामयाब भी होते नजर आ रही है परन्तु इस जल्दबाजी में राष्ट्रीय पुरुस्कारों के महत्व को भी बर्बाद कर देना वास्तविक न्याय के सिद्धान्त पर कदापि न्यायोचित नजर नही आ रहा है।महानगरों की गटरों में प्रतिवर्ष सैकड़ो लोग सुरक्षा उपकरणों के अभाव में मर रहे है।उनके सुरक्षा उपकरण की तोहमत कभी राज्य सरकारों पर तो कभी महानगर पालिका पर थोप देने वाली सरकार ने लगता है आज तक राज्य सरकारों से इस गंभीर विषय पर कोई चर्चा नही कर पाई या यह विषय चर्चा के योग्य ही नही समझा?शायद यही कारण है की गटर में अपनी जान गवाने वालो का मामला राष्ट्रीय बहस में शामिल ही नही हो पाया? इस मामले को लेकर देश के मीडिया की उत्सुकता पूरी तरह अमानवीय होने से सचिन तेंदुलकर जैसे लोग स्वच्छता दूत का पुरुस्कार पाने में सफल होते जा रहे है।जबकी जिनके माता पिता स्वच्छता के लिए गटर में घुट घुट कर दम तोड़ रहे है उनके बच्चे कितना कोसते होंगे सचिन जैसे अंतराष्ट्रीय शख्शियत को समझना चाहिये।(यह उनकेनिजी विचार है आप अपनी प्रतिक्रीया व्यक्त कर सकते है)